सफ़रनामा
Tuesday, June 14, 2011
अनपढ़
मत सिखाओ मुझे
गणित के गुण
साहित्य का सत
भूगोल के नाम पे
मत दिखाओ नक़्शे
रह जाने दो अनपढ़
नहीं चाहती समझना
कलम पकड़ने के तरीक़े
बहने दो मुझे
नदी की तरह
रिसती पत्थरों के बीच
अंधी छलांग लगाती
मूर्ख, निर्भीक
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