सफ़रनामा
Saturday, March 2, 2013
उसके गीत
उसके गीत प्याज़ जैसे
नकली आंसुओं की आड़ में
कुछ असली बहा ले गए
वाहवाही दर्द भरी आवाज़ की
छिपा गयी ग़म, इसी बहाने
सुनने वालों के ज़हन का
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Comments (Atom)