क्या ढूंढ रहा है बन्दे ?
मैख़ाना तो खाली है
था कभी कोई जश्न यहाँ
या सारा आलम जाली है ?
टुक-टुकाती आँखें तेरी
खोज रहीं इतिहास यहाँ
सन्नाटा ही सन्नाटा पर
करता अट्टहास यहाँ
टूटी बोतलों के शीशे
दिला रहे विश्वास तुझे
साकी रहा कभी तो होगा
ताकि सबकी प्यास बुझे
No comments:
Post a Comment